१) तंबाकू क्या है ?
२) तंबाकू चलन में कैसे आया ?
३) तंबाकू का उपयोग धूम्रपान के रूप में कब से चलन में आया ?
४) धूम्रपान के उपयोग के क्या नुकसान है ?
ये तमाम सवाल है जिसका जवाब हम जानने का प्रयास करेंगे तो सबसे पहले जानते हैं
१) तंबाकू है क्या.?
तंबाकू एक प्रकार का निकोटियाना प्रजाति के पेड़ के पत्तों को सुखाकर नशा करने की वस्तु है. दरअसल तंबाकू निकोटिया टेबेकम पौधे से प्राप्त किया जाता है!
इसकी बहुत सी प्रजाति है. यह सर्वविदित है कि पूरे संसार में तंबाकू का दुरुपयोग सिगरेट के रूप में किया जाता है. भारत में इसका उपयोग अनेकों रूप में किया जाता है जैसे-
हम इसे दो भागों में बांट लेते हैं-
1. धुआं रहित
इसमें-
१) तंबाकू वाला पान
२) पान मसाला
३) तंबाकू, सुपारी और बुझे हुए चूने का मिश्रण
४) मैनपुरी तंबाकू
५) मावा
६) तंबाकू और बुझा हुआ चूना (खैनी)
७) चबाने योग्य तंबाकू
८) सनस
९) मिश्री
१०) गुल
११) गुड़ाकु
१२) क्रीमदार तंबाकू पाउडर
१३)तंबाकू युक्त पानी
१४) बज्जर
2. धूम्रपान वाला तंबाकू
१) बीड़ी
२) सिगरेट
३) सिगार
४) चैरट (एक प्रकार का सिंगार)
५) चुट्टा
६) चुट्टे को उल्टा पीना
७) पाइप
८) हुकली
९) धूमटी
१०) धुमटी को उल्टा पीना
११) चिलम
१२) हुक्का
यह तमाम तंबाकू के प्रकार हैं अब आगे की बातें जानते हैं!
अब जानने का प्रयास करते हैं
२) धूम्रपान चलन में कब आया, कैसे आया और इसका इतिहास क्या है?
तंबाकू का चलन आज से लगभग 5000 से 3000 ईसा पूर्व में शुरू हुआ कई सभ्यताओं में धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान इसे सुगंध के तौर पर चलाया जाता था जिसे बाद में आनंद प्राप्त करने के लिए या फिर एक सामाजिक उपकरण के रूप में अपनाया गया! हालांकि पुराने जमाने से ही यह पदार्थ हमेशा आलोचना का शिकार बनता रहा लेकिन इसके बावजूद यह लोकप्रिय हो गया!
३) तंबाकू का उपयोग धूम्रपान के रूप में कब से चलन में आया ?
तंबाकू का उपयोग धूम्रपान के रूप में सबसे पहले या तो संयोगवश लाया गया या उपभोग के नए साधन ढूंढने के क्रम में इसका विकास हुआ.इसका उपयोग झाड़-फूंक के अनुष्ठानों की वजह से भी हो सकती है ऐसा माना जा सकता है. क्योंकि कई सभ्यताओं में इसे धूप के साथ जलाने की परंपरा है!
४) धूम्रपान के उपयोग के क्या नुकसान है ?
तंबाकू का सेवन करने से काफी नुकसान हैं. WHO की एक रिपोर्ट की मानें तो भारत में पिछले 5 सालों में लगभग 22 लाख से अधिक लोग कैंसर से पीड़ित हैं. जिसमें 7 लाख 84 हजार 8 सौ लोगों की मौत हो गई. यह आंकड़ा दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है।
ध्यान रखें यह आंकड़ा 2018 का ही है उसके बाद अभी सर्वेक्षण नहीं हो पाया.
डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट की मानें तो भारत में तंबाकू की वजह से होने वाले कैंसर मरीजों की संख्या सबसे अधिक है. पुरुषों में होने वाले कैंसर के मामले तंबाकू की वजह से अधिकतम 69% है तो वहीं महिलाओं में भी तंबाकू की वजह से कैंसर पीड़ितों की संख्या अधिकतम 27% है.।
तो वहीं करीब 22% जो कैंसर की वजह से मौत होती है वह भी तंबाकू की वजह से होने वाले कैंसर से होते हैैं.
एक रिसर्च के मुताबिक सभी कार्डियोवैस्कुलर (CV) रोगों में लगभग 10% का कारण तंबाकू का सेवन है.
वर्तमान में कोरोना के खतरे के दृष्टिकोण से भी देखें तो तंबाकू के सेवन करने वाले लोगों में कोरोना का खतरा तकरीबन 50% अधिक हो जाता है तो वही करीब 30% दिल के दौरे से मरने वाले लोगों की भी जान तंबाकू की वजह से जाती है.।
अब जरा यह भी समझने का प्रयास करते हैं कि तंबाकू की वजह से भारत की अर्थव्यवस्था पर भी क्या कोई प्रभाव पड़ता है? या फिर अगर भारत के लोग धूम्रपान छोड़ दें तो देश को क्या लाभ हो सकता है ?
तो GATS-2(global adult tobacco survey-2) 2016-17 के आंकड़े की माने तो देश में लगभग 37 करोड़ 44 लाख लोग धूम्रपान या धुआं रहित तंबाकू का सेवन करते हैं.
इस हिसाब से अगर 1 दिन में एक व्यक्ति द्वारा ₹10 भी खर्च किया गया तो 1 दिन में सिर्फ धूम्रपान पर भारत में तकरीबन 374करोड़ 40 लाख रुपए रोजाना खर्च किए जाते हैं! इस हिसाब से एक महीने में 11 हजार 2 सौ 32 करोड़ और एक साल में ये खर्चा कुल 1 लाख 36 हजार 6 सौ 56 करोड़ रुपए भारत के लोग सिर्फ तंबाकू पर खर्च करते हैं यानि की इतनी बड़ी रकम लोग या तो थूक देते हैं या धूंएं में उड़ाते हैं. अब आप अंदाजा लगा सकते हैं ये कितनी बड़ी रकम है!! और ये खर्चा हमारी अर्थव्यवस्था पर कितना असर करता है!
अगर ये खर्चा बचाए जाएं तो कितनों का घर बेघर होने से बच हैं.! कई जिंदगियां बचाई जा सकती है या कहीं और ये पैसा विकास कार्यों में खर्च किए जा सकते हैं!
इसके अलावा तंबाकू की वजह से होने वाले गंभीर बिमारियों जैसे कैंसर, दिल के दौरों आदि पर आने वाले खर्च को हमने शामिल नहीं किया है! अगर आप चाहें तो इसका भी एक औसत आंकड़ा निकाल सकते हैं. और जो लोगों की जानें जाती हैं उसका आप क्या मूल्य लगाएंगे विचार कर लें।



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