मिट गई 2 गज की दूरी बिहार में चल रहा है बुंदिया और पूरी...... उपरोक्त बातें भले ही व्यंग लग रही हो लेकिन यह सत्य है एक तरफ सरकार की कोरोना के खिलाफ जद्दोजहद तो दूसरी तरफ समाज के तथाकथित बुद्धिजीवी अपने घर एवं आस पड़ोस की शादियों में इस तरह शिरकत करते हैं मानो बिहार के फिजाएं अन्य प्रदेशों से अलग है बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में वैवाहिक कार्यक्रमों में अप्रत्याशित भीड़ आपको यह बताने के लिए काफी है यहां सरकार के द्वारा लगाए गए लॉकडाउन और 2 गज की दूरी का पालन कतई नहीं हो पा रहा है एक तरफ सरकार जहां सामाजिक कर्तव्यों के निर्वहन हेतु वैवाहिक कार्यक्रमों में 20 लोगों की उपस्थिति और श्राद्ध कर्मों में व्यक्ति की संख्या निर्धारित किए हुए हैं वही उसकी आड़ में हर जगह इस की धज्जियां उड़ते आप देख रहे हैं क्या हमारा और समाज का कर्तव्य नहीं बनता है सरकार के निर्देशों का हम पालन करें क्या यह भीषण महामारी सिर्फ सरकारी आंकड़ों तक सीमित है पहले शहरी लोग प्रकोप में थे अब हर गांव कस्बे में मौत की भयावहता के बावजूद भी लोग सतर्क नहीं दिख रहे तो समाज के वैसे तथाकथित बुद्धिजीवियों को क्या समझा जाए यह यक्ष प्रश्न है विचारनिय है इसे अमल में लाया जाना चाहिए नहीं तो इसकी भयावहता कुछ और ही होगी
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Good
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