गुलामी के बीज को हमारे धमनियों में बड़े आराम से वामपंथियों द्वारा प्रवाहित कर दिया जाता है.जिसका हमें अंदाजा भी नहीं होता और आज जब वही गुलामी के सुर हमारे लोगों के सर चढ़कर तांडव कर रहा होता है तो हमें मूकदर्शक हो जाना पड़ता है.
जरा सोचिए आपको कैसे एक परिसीमा में एक परिधि के अंतर्गत बांधा गया. जिस वजह से आपमें किसी बिंदु को दूसरे नजरिए से देखने तक की क्षमता नहीं बची, आपमें किसी विषय के तह तक जाकर सच्चाई को जानने की जिज्ञासा तक नहीं रही.
आखिर क्या वजह है जो आपके मन में ये विचार भी उत्पन्न नहीं होते? कभी सोचा है आपने?
हम सब यह जानते हैं की हवाई जहाज को सबसे पहले राइट ब्रदर्स ने नहीं "शिवबाबू तलपडे" ने उड़ाया था. लेकिन फिर भी एग्जाम्स में हम 'राइट ब्रदर्स' को ही टिक करके आते हैं। आखिर क्यों?
आखिर क्यों इतिहास के पन्नों से आज भी दहाड़ने वाले महान राजा समुद्रगुप्त जिनका खौफ विश्व भर में इस कदर था कि बड़े-बड़े राज्य के राजा-महाराजा समय-समय पर बिना मांगे कर भेज दिया करते थे। बिना युद्ध किए ही इनके सामने घुटने टेक आत्मसमर्पण कर देते थे। इस भय से कि कहीं उन्हें समुद्रगुप्त से युद्ध ना करना पड़ जाए।
लेकिन क्या हमारे इतिहासकारों ने इन्हें इतिहास में समुचित स्थान दिया?
नहीं! एक उपनाम जरूर दिया। इन्हें "भारत का नेपोलियन'' कहा जाता है और हम संतुष्ट भी हैं। हमें कोई आपत्ति भी नहीं। हमें जॉब इंटरव्यू में यह सवाल पूछा जाता है कि - भारत का नेपोलियन.....? हम तुरंत 'समुद्रगुप्त' कहकर गौरवान्वित हो उठते हैं।
लेकिन क्या कभी आपके मन में यह विचार आया कि आखिर क्यों समुद्रगुप्त को 'भारत का नेपोलियन' कहा जाता है? नेपोलियन को "यूरोप का समुद्रगुप्त" क्यों नहीं कहा जाता? जबकि नेपोलियन समुद्रगुप्त की मृत्यु के 1400 वर्ष बाद पैदा हुआ था?
इतिहास के चैप्टर में हमें अकबर के नौ रत्नों के बारे में जरूर पढ़ा दिया जाता है. लेकिन क्या कभी भी, कहीं भी आपने राजा कृष्णदेव राय के अष्ट-दिग्गजों के बारे में पढ़ा? आपको किसी ने बताया ?
बहुत शर्म की बात है!
बचपन से ही हमें फिल्मों, धारावाहिकों और किताबों के जरिए सिखाया गया, पढ़ाया गया कि भारत की प्रथम महिला शासिका "रजिया सुल्तान" थी। ताकि लोगों के बीच यह संदेश जाए कि 'नारी के सम्मान और नारी के समानता के अधिकारों' की सबसे अधिक चिंता इस्लाम को है।
जबकि हमें यह कभी नहीं पढ़ाया गया कि चंद्रगुप्त द्वितीय की पुत्री और वाकाटक नरेश रूद्रसेन द्वितीय की पत्नी "प्रभावती गुप्त" रजिया सुल्तान से 846 वर्ष पूर्व वाकाटक की शासिका बन चुकी थी।
प्रभावती का शासन लगभग 13 वर्षों तक चला उसके बाद उनके पुत्र दामोदर सेन सिंहासन पर बैठे थे।
हां! यही सच है! आप सोच ही नहीं सकते और ना ही आप इन सच को जान कर भी कुछ कर पाएंगे। क्योंकि आप इतिहास को खुद पर गौरवान्वित होने के लिए अथवा सत्य जानने के लिए नहीं बल्कि एग्जाम में आने वाले वस्तुनिष्ठों का हल ढूंढने के लिए पढ़ते हैं।
जबकि हमें जरूरत है सच्चाई को जानने की अपने विचारों को बदलने की!!
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