सूचना बाँटने वाला हर व्यक्ति शिक्षक नहीं बन जाता।
आजकल नाम के आगे "सर" लगा लेने से लोग खुद को गुरु समझने लगते हैं।
लेकिन शिक्षक की पहचान उसके शब्दों से नहीं, उसके संस्कारों से होती है।
शिक्षक वह है जो शालीनता सिखाए, शिष्टाचार सिखाए, चरित्र गढ़े, भटके हुए को सही रास्ता दिखाए।
पर आज कुछ लोग शिक्षा को भी बाज़ार बना चुके हैं।
जिनकी भाषा में मर्यादा नहीं...
जिनकी वाणी में संयम नहीं...
जिनके शब्दों से ज्ञान नहीं, अहंकार और अभद्रता टपकती हो...
वे शिक्षक नहीं, सिर्फ़ कंटेंट बेचने वाले व्यापारी हैं।
याद रखिए...
ज्ञान बिक सकता है, लेकिन गुरु नहीं।
और जो अपने आचरण से शिक्षा का सम्मान नहीं कर सकता, वह किसी का भविष्य क्या बनाएगा?
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